सवाल: करना जरूरी है!

SAWAAL : आखिर क्यों लोग नहीं चाहते सवाल पूछना

यदि आपको इस विषय में कुछ खास दिलचस्पी नहीं है तो मेरा आपसे आग्रह है कि आप इसे ना पड़ें 

इस समाज को सबसे ज्यादा बुरी बात यह लगती है कि आप उससे सवाल करो, लेकिन आपके लिए सबसे ज्यादा और महत्वपूर्ण बात यही है कि आप सवाल करो..।

आप जिस समाज में रहते हैं उसमें अनेकों प्रकार के चीज आपके ऊपर प्रभाव डालते हैं . आप उस समाज का हिस्सा है जो किसी एक की से नहीं बना है। वह अनेकों प्रकार के जीव जंतु वस्तु और विचार से मिलकर बना है।

यदि आप उस समाज का  हिस्सा हैं तो आप उन सभी चीजों का, उन सभी तत्वों का, उन सभी विचारों का भी हिस्सा है।  अर्थात उन सभी चीजों का सामूहिक रूप ही आप हैं और आप ही समाज है।

प्रकृति में उपस्थित अनेकों ऐसी चीज है जो आपको लगता है, यह मेरे मतलब का नहीं है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। कई बार कई चीजें ऐसी होती है जो आप को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं करते लेकिन, इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि वह आपको प्रभावित ही नहीं करते है। हां कुछ चीजें ऐसी हो सकती है।  मैं ऐसा कुछ दावे के साथ नहीं कहता कि नहीं ही होगी फिर भी मेरा मानना है कि ज्यादातर चीजें ऐसी हैं जो आप को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है।

आज हम जिस विषय को लेकर आए हैं वह एक शब्द है। सवाल।  सवाल क्यों जरूरी है? यह भी एक सवाल है और हम यहीं से शुरू करते हैं।

जब हम छोटे से थे हमें कोई कुछ कह देता था और हम उसे मान लेते थे हम में सोचने की क्षमता नहीं थी।  दूसरे शब्दो में कहें कि तब तक हम में सोचने की क्षमता विकसित नहीं हुई थी। हमारे अंदर सिर्फ कुछ जिज्ञासा  होती थी जिसके वजह से ही हम प्रश्न कर लेते थे और उसके जवाब में जो मिलता था उसको मान लेते थे।  अगर हम आप आज भी उसी तरीके से किसी भी बात को सिर्फ सुन लेने मात्र से मान ले या देख लेने से मान लें तो हम आज भी उसी बालक के समान हैं जिनमें सोचने की क्षमता अभी विकसित नहीं हुई है। 

मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि जो लोग सवाल करने से चूक जाते हैं या डरते हैं या जिनके मन में सवाल आता ही नहीं है वह अभी भी एक छोटे से बालक के समान है।  उम्र कुछ भी हो आप में सोचने की क्षमता नहीं आयी।  क्योंकि मेरा मानना है कि जब आप में सोचने की क्षमता आती है तो आप प्रश्न करना शुरू करते हैं।  इसको आप दूसरे शब्द में भी कह सकते हैं कि जब आप किसी बात को एक प्रश्न के जरिए सही या गलत के मुकाम पर ले जाते हैं मतलब आप उसे जांच परख कर, अपनी पूरी सूझबूझ का इस्तेमाल कर के, अन्य तथ्यों के जरिए उसे समझ के एक निष्कर्ष निकालना चाहते हैं।  जो इस बात का द्योतक है कि आप सोचने लगे हैं।

यह समाज थोड़ा अलग है, इसमें अधिकतर लोग आपके प्रश्न को या तो गलत दिशा में ले जाते हैं या फिर आपको प्रश्न करने से मना करते हैं। उन सब का एक ही मतलब है। क्योंकि उनके पास जवाब नहीं है! वह सवाल नहीं सुनना चाहते।  उनको सवाल बार-बार ना सुनना पड़े इसलिए वह सवाल करने वाले को ही गलत बतलाना शुरू कर देते हैं। मतलब गलत साबित करना शुरू कर देते हैं। जाहिर तौर पर वह जवाब नहीं जानते हैं। अब सोचिए जिन लोगों को अपने ही बातों का मतलब नहीं पता वह आपको समझा रहे हैं। जो अपने ही मान्यताओं को समझे नहीं है वह आपको ज्ञान दे रहे हैं. उनको उसी मान्यता के बारेमें किए गए कुछ सवाल का जवाब नहीं पता। फिर भी वह अपनी मान्यताओं को ही सही ठहरा रहे है। 

ऐसा कोई भी इंसान जो थोड़ा भी समझ रखता है, ऐसा नहीं कर सकता है। सच पूछो तो यह सवाल का जवाब ना होने से आगे का सवाल है। आखिर कोई यह जानते हुए कि यह मान्यता, यह परंपरा एक सवाल से खत्म हो जाती है, फिर भी वह क्यों मानता है। यह बड़ा सवाल है।  क्योंकि ऐसी मान्यताओं की बुनियाद पर बहुत बड़ा व्यवसाय खड़ा है। 

जी हाँ, मान्यताओं का व्यवसाय, धंधा, बिजनेस।  यही वजह है कि वह आपके सवाल का जवाब तो नहीं दे सकते लेकिन आपनी मान्यता, परंपरा, धर्म आदि के नाम  पर आप पर 

को अंधभक्त बनाना चाहते है। ताकि वो सवालो के घेरो से बाहर रह सके। ऐसा नहीं होने पर वो सवाल करने वाले को चुप करना चाहते है। इसके लिए भी वो कैसे प्रकार के अंधविश्वश आदि का सहारा लेते है। अंत जब कुछ भी काम नहीं आता तो वो बल का प्रयोग करते है। ताकि उनका धंधा चलता रहे। 

यदि आप फिर भी नहीं रुके तो ये आप के खिलाफ लोगो को भड़काते हैं। चाहे जिस प्रकार से हो इसके लिए जरूरी होता है सबसे ज्यादा ऐसे लोगों का हुजूम इकट्ठा करना जो आपको गलत ठहर सकें अब वो लोग सामने आते हैं जो आसानी से इनकी बातो मे आ सके। मतलब वो लोग जो सोचते नहीं है अक्सर किसी के बाते आसानी से आ जाते है। और इस प्रकार जो दमन चलता है उसमें मरने वाला और मारने वाला दोनों आप ही होते हो। 

हमारे इतिहास में ऐसी हजारो घटना आप को मिल जाएगी जो मेरी बातों को पुष्ट करती है। लेकिन आप को इतिहास से क्या लेना देना, आप को तो वही करना है जो किसी और ने आप से कहा हो। आप को मेरी बातें बकवास लग रही होगी, लेकिन बहुत दिनो तक नहीं लगेगी। बहुत जल्द प्रकृति आप को खुद सवाल करना सीखा देगी। लेकिन तब तक आप कुछ ऐसा खो चुके होंगे जो वापिस नहीं हो सकेगा। 

 

इस समाज को सबसे ज्यादा बुरी बात यह लगती है कि आप उससे सवाल करो लेकिन आपके लिए सबसे ज्यादा और महत्वपूर्ण चीज यही है कि आप सवाल करो..।

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