तेरी गुड़िया, तेरी बेटी हुई हूँ। -बम्भू

तथाकथिक तेरी जाती, धर्म, समाज तेरी,ये उंच-नीच, तीन-पाँच तेरी,मैं मरी नहीं, मारी गयी हूँ, बात सुनो,महज़ वो चार नहीं, कातिल समाज बात सुनो,गाँव के प्रधान, और थाने के कोतवाल सुनो,दयाल-दीन-गुरु-धर्म-के-समाज…

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तेरी गुड़िया, तेरी बेटी हुई हूँ।  -बम्भू
तेरी गुड़िया, तेरी बेटी हुई हूँ

भारत की युवा जनता और वैचारिक नपुंसकता

उस रोटी का भी क्या जिसे तुम्हारे लास पर सेका जाये। समाज को धर्म के आधार पर बाटा जा रहा है और इसमे सभी धर्म अपना-अपना योगदान रहे है। कोई…

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भारत की युवा जनता और वैचारिक नपुंसकता
TNT | The Negative Thinker भारत की युवा जनता और वैचारिक नपुंसकता