किसान आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली बॉर्डर पर काफी सख्त बैरिकेडिंग

देश में किसान आंदोलन को 2 महीने से ऊपर का हो चुका है। दिल्ली के चार बॉर्डर पर किसान संगठनों के नेता और किसान धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जैसा कि हम जानते हैं 26 जनवरी 2021 के बाद सरकार काफी सख्त नजर आ रही है ।

हम आपको एक बार और बता दे की 26 जनवरी 2021 के दिन, जब भारत 72वा गणतंत्र दिवस मना रहा था। भारत के राज्य पथ पर भारत के राष्ट्रीय त्योहार गणतंत्र दिवस को सेलिब्रेट किया जा रहा था। जहां देश के सभी मंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और गणमान्य अतिथि मौजूद थे।

वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की सड़कों पर किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ ट्रैक्टर परेड कर रहे थे। इस ट्रैक्टर परेड में किसान नेता और किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली के सड़कों पर दिल्ली पुलिस द्वारा बताए गए रास्तों से मार्च करते हुए अपने शुरुआती स्थान तक पहुंचने वाले थे। हालांकि ऐसा हो नहीं पाया कुछ। शरारती तत्वों की वजह से छिटपुट घटनाएं सामने आई थी । इसके बाद से ही पुलिस आंदोलनकारी किसान को लेकर काफी सख्त नजर आ रही है। हालांकि कई लोग दिल्ली पुलिस के काम पर सवालिया निशान खड़े करते हैं।

जिसमें 28 जनवरी को गाजीपुर बॉर्डर पर जो घटना हुई । जिसमें आंदोलनकारियों के पानी रोक दिया गया और बिजली भी काट दी गई । इसके बाद उत्तर प्रदेश के दो विधायक वहां पर आए और उनके साथ सैकड़ों की तादाद में उनके समर्थक भी आए। ऐसा किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा । राकेश टिकैत के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के दो विधायक जो कि उत्तर प्रदेश से आते हैं, वह गाजीपुर बॉर्डर पर धरना स्थल पर पहुंचे। उनके साथ 300 के आसपास समर्थक भी थे जिनके पास लाठी वगैरह होने की संभावना भी उन्होंने जताया।

राकेश टिकैत के अनुसार विधायक और उनके समर्थकों का मनसा ठीक नहीं था। ऐसा लगता था कि वह आंदोलनकारी, किसानों को नुकसान पहुंचाने, किसान नेताओं और किसानों पर हमला करना चाहते हैं, ताकि आंदोलन को खत्म किया जा सके और आंदोलन स्थल को खाली करवाया जा सके।

अगले दिन सिंघु बॉर्डर पर भी कुछ इसी प्रकार की घटना सामने आई जिसमें दिल्ली से कुछ लोग जो पुलिस के उपस्थित में बैरिकेड पार करके आंदोलन स्थल के तरफ आए और उन्हें पुलिस ने नहीं रोका। यह लोग आंदोलन स्थल पहुंचकर किसानों को अपशब्द बोला और नारेबाजी की । पुलिस के मुताबिक यह लोग स्थानीय लोग थे । लेकिन सूत्रों से पता चलता है कि यह लोग स्थानीय लोग नहीं थे बल्कि दिल्ली के बवाना और नरेला इलाके के लोग थे और यहां धरना स्थल खाली करवाने के उद्देश्य से बुलाए गए थे।

इन लोगों ने जो स्थानीय लोगों के लिवास में आए थे आंदोलनकारी किसानों पर पथराव किया, अपशब्द का व्यवहार किया और आपत्तिजनक नारे लगाए। जब यह लोग पथराव कर रहे थे उस वक्त भी पुलिस कुछ खास रिस्पांस नहीं कर रही थी। कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि दिल्ली पुलिस भी पथराव की। हालांकि इस बीच कुछ किसानों ने भी जवाबी तौर पर पथराव किए लेकिन ज्यादातर किसान नेता और स्वयंसेवक लोगों को समझाने और शांति बनाए रखने की अपील करते हुए नजर आए।

इस घटना के बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया । इसके अगले दिन टिकरी बॉर्डर पर इसी प्रकार की घटना सामने आए ।

गाजीपुर बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने रास्ते को बहुत ही आपत्तिजनक तरीके से बंद किया है। एक पत्रकार के मुताबिक रास्ते को इस तरीके से ब्लॉक किया गया है की पैदल भी धरना स्थल तक नहीं पहुंचा जा सकता । पत्रकार के मुताबिक उनके कैमरा पर्सन, तकरीबन 2 घंटे से धरना स्थल पर जाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पहुंच नहीं पाए थे। दिल्ली पुलिस ने मुख्य रास्ता के साथ-सथ पैदल रास्ते को भी बंद कर दिया है। मुख्य रास्ते पर सीमेंट के सिल्लीयों को रखा गया है। सीमेंट से मुख्य रास्ता को बंद करने के लिए लोहे के बेरीकेट यूज किया गया है। इसके अलावा सीमेंट के सिल्ली तथा कंक्रीट की दीवारें खड़ी की गई है।

रास्ते पर कंक्रीट से प्लास्टर करके उस पर नुकीले तार, सरिया और कील बिछाए गए हैं, साथ ही रास्तों को कटीले तार से घेरा गया है।

देख कर ऐसा लगता है जैसे इस वेरीकेट के उस पार कोई खतरनाक जंगली जानवर को रोककर रखने का प्रयास किया जा रहा है ।

इतिहास में शायद पहली बार इस प्रकार की बेरीकटिंग देखने को मिल रहा है । कम से कम मैंने अब तक इस प्रकार की तस्वीर ना तो देखा हूं और ना ही ऐसी किसी घटना को सुना या पढ़ा हूं, जिसमें इस प्रकार से आंदोलन को बेरीगेट के जेल में कैद किया गया हो ।

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