कुदरत के आगे सब लाचार : चेन्नई के डॉक्टर के शव को दफनाने पर लोगो का गुस्सा

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Twitter के हवाले से :

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टिप्पणी : कोरोना महामारी जब से आयी है। जहाँ एक तरफ हमने हमारे देश और पूरे विश्व में एकता देखी है। सक्षम लोग जरूरतमंद लोगो की मदद करने के लिए आगे आए है। सभी धर्म समाज आगे – बढ़कर इस महामारी से लड़ने के लिए आगे आये है। जो की ये दिखा रही है कि इंसानियत अभी भी ज़िंदा है। मगर जहाँ अच्छा हो रहा है तो बुरा भी हो रहा है बिलकुल उसी तरह जैसे हर सिक्के दो पहलू होते है , जैसे रात और दिन , पूरब और पश्चिम होता है। एक ऐसे ही घटना हुई जिसने एक बार फिर से इंसानियत पर से भरोसा उठाने का काम किया है। देखिये कैसे एक डॉक्टर के शव को कब्रिस्तान में शव को दफनाने पर लोगो को गुस्सा आ गया। खैर मेरी राय या बातों से आप आहात ना होईए तो अच्छा है . देखिये The Lallantop का ट्विट-

क्या लिखा है ट्विट में -

चेन्नई में एक डॉक्टर की COVID-19 से मौत हुई. शव को दफनाने के लिए उनके साथी और परिजन कब्रिस्तान पहुंचे, तो भीड़ ने एम्बुलेंस पर पत्थरों और लाठी से हमला कर दिया. मौक़े से डॉक्टर की पत्नी और बेटे को भागना पड़ा. तीसरी कोशिश में डॉक्टर के शव को दफनाया जा सका. – The Lallantop
चेन्नई के स्वर्गीय डॉक्टर साइमन
कोरोना संक्रमण की वजह से जिनकी मौत हुई बाएं तरफ़ डॉक्टर साइमन और दाएं तरफ़ वो एम्बुलेंस जिसपर भीड़ ने पत्थर चलाए गए (तस्वीरें: इंडिया टुडे)

क्या है पूरा मामला -

चेन्नई के 55 साल के न्यूरोसर्जन डॉक्टर साइमन हरक्युलिस अप्रैल के शुरुआत में कोरोना पॉज़िटिव पाये गए। वह हार्ट मरीज़ भी थे। कोरोना होने के बाद उनकी हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती चली गयी। फिर उन्हे वेंटिलेटर पर रखा गया। लेकिन हार्ट अटैक आने की वजह से 19 अप्रैल को उनका देहांत हो गया। उनके देहांत के उपरांत हॉस्पिटल ने डॉक्टर साइमन का शव उनके परिवार को दे दिया गया। उनका परिवार उनके शव को दफनाने के लिए किल्पौक सिमेट्री के कब्रिस्तान में ले गए। यहां इन्हें बताया जाता है कि कोरोना फैलने के दर से सिमेट्री के पास काफी लोग जमा हो गए हैं, इसलिए उनके परिवार वाले उन्हें दूसरे कब्रिस्तान ले गए। यहां से उनका परिवार एम्बुलेंस में वेलंगडू के एक कब्रिस्तान आया। यहां पहले से 70-80 लोग जमा थे। भीड़ ने एम्बुलेंस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। एम्बुलेंस स्टाफ़ को ये लोग डंडों से पीटने लगे। एम्बुलेंस का शीशा पूरी तरह से टूट गया और खबर के मुताबिक़ दोनों ड्राइवरों को काफ़ी चोटें आईं। एम्बुलेंस के पीछे अपनी कार से आए हॉस्पिटल के डॉक्टर प्रदीप एम्बुलेंस को वापस अस्पताल लेकर आ गए।
इसके बाद डॉक्टर प्रदीप उनके शव को पुलिस को साथ लेकर दूसरे कब्रिस्तान ले गये। दोनों ड्राइवर जख्मी थे, इसलिए डॉक्टर प्रदीप ने ख़ुद PPE (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) किट पहनी और हॉस्पिटल के दो वॉर्ड बॉय को अपने साथ ले लिया। जब वो कब्रिस्तान पहुंचे तो कब्रिस्तान के आस-पास भीड़ थी। लेकिन इस बार पुलिस ने मामला संभाल लिया। डॉक्टर प्रदीप ने बताया कि वहाँ पर एक ही फावड़ा होने की वजह से उन लोगों को घंटे भर खुदाई करनी पड़ी। भीड़ के दोबारा हमले का भी डर था। इसलिए डॉक्टर साइमन का शव दफनाते ही वो लोग वहां से निकल गए।
इंडिया टुडे टीवी को दिए गए इंटरव्यू में डॉक्टर प्रदीप कुमार
तस्वीरे : इंडिया टूडे

कौन है इस घटना का जिम्मेदार -

ऐसा क्या हुआ की इस महामारी के आते ही एक डॉक्टर के शव को लोग कब्रिस्तान में दफनाने के लिए इतना गुस्सा हो गए। उस डॉक्टर के लिए जो आपके लिए इस बीमारी से लड़ रहा है आपका इलाज़ कर रहा है अपने परिवार से दूर रह कर, उनकी जिंदगी और अपनी जिंदगी खतरे में डाल कर। ऐसा क्या हुआ की लोग ऐसे अमानवीयता भरे कदम उठाने पर मजबूर हो गए। मैं इसका पूरा जिम्मेदार सोश्ल मीडिया के द्वारा फैलाये गलत मैसेज और वीडियो को समझता हूँ जिसने लोगो के बीच गलत जानकारी फैलाई। आज लगभग हर व्यक्ति के पास फोन होता है और वो उसे खोलता है और सबसे पहले सोश्ल मीडिया खोल कर खबर पढ़ता है और बिना सोचे समझे उसे सच मान लेता है। ये सोश्ल मीडिया आज के समय में इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बनता जा रहा है। ये हमारे अंदर जहर घोलता जा रहा है।

खैर इससे बचने के लिए हमे बस सोश्ल मीडिया पर आँख बंद करके विशवास करना छोड़ना होगा। जैसे हमारे बढ़े-बूढ़े कह गए है की किसी भी चीज़ पर आँख बूँद कर विशवास नहीं करना चाहिये।

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